रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मौद्रिक नीति में किया बदलाव! जानें क्या पड़ेगा इसका आम आदमी पर असर?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। हालांकि RBI ने रेपो दर को अपरिवर्तित रखा है, जो 6.5 प्रतिशत पर बनी हुई है, लेकिन कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में 50 आधार अंकों की कटौती की गई है, जिससे यह 4 प्रतिशत हो गया है। इस निर्णय का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाना है।

रेपो दर और इसका प्रभाव

रेपो दर वह दर है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण प्रदान करता है। जब रेपो दर कम होती है, तो बैंकों के लिए ऋण लेना सस्ता हो जाता है, जिससे वे अपने ग्राहकों को कम ब्याज दरों पर ऋण प्रदान कर सकते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ सकती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

CRR में कटौती का प्रभाव

CRR में कटौती से बैंकों के पास अधिक सरलता उपलब्ध होगी, जिससे वे अधिक ऋण प्रदान कर सकेंगे और अर्थव्यवस्था में सरलता बढ़ेगी। इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है और ब्याज दरें कम हो सकती हैं।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषकों का अनुमान है कि RBI जल्द ही रेपो दर में कटौती कर सकता है, जिससे ब्याज दरें कम हो सकती हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है। नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, RBI 2025 के अंत तक रेपो दर में 100 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जिससे रेपो दर 5 प्रतिशत हो जाएगी।

आर्थिक विकास पर प्रभाव

RBI के निर्णयों का आर्थिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। यदि RBI रेपो दर में कटौती करता है और CRR में और कटौती करता है, तो इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है और ब्याज दरें कम हो सकती हैं। इससे घरेलू मांग बढ़ सकती है और आर्थिक विकास की दर में सुधार हो सकता है।

RBI के निर्णयों का आर्थिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। यदि RBI रेपो दर में कटौती करता है और CRR में और कटौती करता है, तो इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है और ब्याज दरें कम हो सकती हैं। इससे घरेलू मांग बढ़ सकती है और आर्थिक विकास की दर में सुधार हो सकता है। अब देखना होगा कि RBI आगे क्या निर्णय लेता है और इसका आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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Author: Nation TV

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