प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य देश में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और छोटे व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना की शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को नई दिल्ली में की थी। मुद्रा का पूर्ण रूप माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रीफाइनेंस एजेंसी (Micro Units Development and Refinance Agency) है। यह योजना गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु और सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करके उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
योजना के उद्देश्य
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे व्यवसायों को बढ़ने, रोजगार पैदा करने और देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने में मदद करना है। इस योजना का लक्ष्य उन छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों के लिए एक प्रभावी ऋण वितरण प्रणाली विकसित करना है जो अक्सर पारंपरिक बैंकों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करते हैं। यह योजना उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और एक समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास मॉडल को बढ़ावा देने पर भी केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएं:
गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि उद्यम:
यह योजना मुख्य रूप से गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र के छोटे और सूक्ष्म उद्यमों पर केंद्रित है। इसमें व्यक्तिगत व्यवसायी, छोटे निर्माता, सेवा प्रदाता, दुकानदार, फल और सब्जी विक्रेता आदि शामिल हैं। योजना के तहत दिए जाने वाले ऋण बिना किसी गारंटी के हो सकते हैं, जिससे छोटे उद्यमियों के लिए ऋण प्राप्त करना आसान हो जाता है।
योजना के तहत कई तरह के ऋण:
शिशु श्रेणी के तहत ₹50,000 तक का ऋण दिया जाता है। यह नए व्यवसाय शुरू करने या छोटे पैमाने पर जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयुक्त है।
किशोर: इस श्रेणी में ₹50,000 से लेकर ₹5 लाख तक का ऋण दिया जाता है। यह उन व्यवसायों के लिए है जो पहले से स्थापित हैं लेकिन विस्तार या नए उपकरण खरीदने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता है।
तरुण: इस श्रेणी के तहत ₹5 लाख से लेकर ₹20 लाख तक का ऋण दिया जाता है। यह उन अपेक्षाकृत बड़े छोटे व्यवसायों के लिए है जिन्हें अपने संचालन को बढ़ाने या नए बाजारों में प्रवेश करने के लिए अधिक वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। हाल ही में तरुण श्रेणी में कर्ज लेकर सफलतापूर्वक चुकाने वालों के लिए तरुण प्लस नामक एक नई ऋण श्रेणी भी शुरू की गई है, जिसमें ₹10 लाख से ₹20 लाख तक का ऋण प्राप्त किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने देश के छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 8 अप्रैल 2025 तक, इस योजना ने अपनी शुरुआत के बाद से 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इन वर्षों में, इस योजना के तहत ₹32.61 लाख करोड़ से अधिक का ऋण वितरित किया गया है, जिसमें 52 करोड़ से अधिक ऋण खाते शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से 100 मिलियन से अधिक ऋण पहली बार लेने वाले लोग थे।
मुद्रा योजना के लाभार्थियों में महिलाओं की एक महत्वपूर्ण संख्या है, जो इस योजना के समावेशी पहलू को दर्शाती है। लगभग 68% लाभार्थी महिलाएं हैं। वित्तीय वर्ष 2016 से वित्तीय वर्ष 2025 तक, महिला लाभार्थियों को प्रति ऋण वितरण में 13% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उद्यमियों की भी इस योजना में महत्वपूर्ण भागीदारी रही है, जो वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को मजबूत करती है। अल्पसंख्यक समुदायों के भी 11% मुद्रा ऋणधारक हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करने और देश में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने में एक सफल पहल साबित हुई है। यह योजना उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी है जिनके पास पारंपरिक वित्तीय संस्थानों तक आसान पहुंच नहीं थी।
योजना के लाभ हेतु स्थानीय बैंकों या फिर सरकारी निकाय से संपर्क किया जा सकता है।


