कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। यह हमला संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की वकालत की थी।
राहुल गांधी ने इस बयान को लेकर आरएसएस की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि एक बार फिर उनका असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने आरएसएस और बीजेपी पर संविधान को कमजोर करने और देश को मनुस्मृति की ओर ले जाने का आरोप लगाया।
क्या कहा राहुल गांधी ने?
राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा:
“आरएसएस का नकाब फिर से उतर गया। संविधान इन्हें चुभता है क्योंकि वह समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है। RSS‑BJP को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए। वे बहुजनों और ग़रीबों से उनके अधिकार छीनकर उन्हें नए रूप में ग़ुलाम बनाना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हर देशभक्त भारतीय को संविधान की रक्षा के लिए आगे आना होगा और यह लड़ाई विचारधारा की है।

होसबोले के बयान में क्या था?
RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे शब्द आपातकाल के दौरान 1976 में जोड़े गए थे। उन्होंने सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए और इन्हें प्रस्तावना से हटाया जाए।
उनका तर्क था कि संविधान के मूल स्वरूप में ये शब्द नहीं थे और इन्हें राजनीतिक कारणों से जोड़ा गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का विरोध
राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी संघ और भाजपा पर हमला बोला। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, “यह बयान संविधान के मूलभूत सिद्धांतों पर सीधा हमला है।”
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी बयान की निंदा करते हुए कहा कि “संविधान को बदलने की सोच देश को पीछे ले जाएगी।”
समाजवादी पार्टी और बसपा जैसे विपक्षी दलों ने भी संघ के विचार को लोकतंत्र और समानता विरोधी करार दिया है।
संविधान और मनुस्मृति की बहस
राहुल गांधी ने अपने बयान में खासतौर पर ‘मनुस्मृति’ का जिक्र किया, जिसे दलित और पिछड़े वर्गों के बीच प्रतीकात्मक रूप से सामाजिक भेदभाव का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस संविधान को हटाकर भारत को फिर से जातीय आधारित समाज बनाना चाहता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान ग़रीबों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को जो अधिकार देता है, वह संघ को स्वीकार नहीं है।
जनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व बार-बार भाजपा और संघ की विचारधारा को संविधान विरोधी करार देते रहे हैं।
वहीं भाजपा ने इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने निजी तौर पर होसबोले के बयान को “व्यक्तिगत विचार” बताया है।


