बिहार में मानसून की दस्तक के साथ आफ़त भी आ गई है। रविवार देर शाम से लेकर सोमवार सुबह तक राज्य के अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम पाँच लोगों की मौत हो गई। इन हादसों ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हादसे कहां-कहां हुए?
सबसे ज्यादा असर नालंदा, बक्सर और भोजपुर जिलों में देखने को मिला।
- नालंदा जिले के सिरसिया बिगहा गांव में 45 साल की सूरजा देवी और पासंगी गांव की 45 साल की मीना देवी बिजली गिरने से जान गंवा बैठीं।
- बक्सर जिले के कुकुरभुंका गांव में 12 साल का मोहित कुमार अपने खेत में खेल रहा था, तभी तेज आवाज के साथ बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई।
- भोजपुर जिले में दो बुजुर्ग सुदर्शन यादव (65) और गणेश यादव की जान इसी वजह से चली गई।
इनके अलावा गया जिले में वाटरफॉल घूमने गई छह लड़कियां तेज बहाव में बह गई थीं, जिन्हें ग्रामीणों ने समय रहते बचा लिया।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने बिहार के 19 जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई है। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि इस दौरान पेड़ के नीचे खड़े न हों, खुले में मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक चीजें इस्तेमाल न करें और खेतों में काम करने से बचें।
सरकार और प्रशासन की तैयारी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में ऐसी घटनाओं पर गहरा दुख जताया था और मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि देने की बात कही थी। हालांकि इस ताज़ा हादसे में अभी मुआवजे की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को जल्द मदद पहुंचाई जाएगी।
पेड़ों की कटाई भी बनी कारण?
मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि ताड़ जैसे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी आकाशीय बिजली के बढ़ते खतरे का एक बड़ा कारण है। ताड़ के पेड़ बिजली को जमीन में भेजने में मदद करते हैं। हाल ही में एनजीटी ने बिहार सरकार को नोटिस भेजकर ताड़ के पेड़ों की कटाई पर जवाब मांगा है।
गांवों में मातम का माहौल
इन घटनाओं से गांवों में मातम छाया हुआ है। बक्सर में मोहित के पिता ने रोते हुए कहा, “हमने कभी सोचा नहीं था कि खेत में खेलता हुआ हमारा बेटा इस तरह चला जाएगा।” नालंदा में भी महिलाओं की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
बिजली गिरने की ये घटनाएं मानसून के आते ही बिहार में आम होती जा रही हैं। ज़रूरत है कि लोग अलर्ट रहें और प्रशासन भी ग्रामीण इलाकों में ज्यादा जागरूकता अभियान चलाए, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।


