देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और अनियंत्रित गेमिंग के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा लाए गए गेमिंग रेगुलेशन बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही यह बिल अब कानून का रूप ले चुका है और पूरे देश में लागू हो गया है। इस नए कानून के तहत किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी, जुए या पैसे लगाकर खेले जाने वाले खेलों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
बढ़ते खतरे के चलते आया बिल
पिछले कुछ वर्षों में देश में ऑनलाइन गेमिंग और खासकर सट्टेबाजी वाले खेलों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी थी। कई युवाओं ने इस तरह के खेलों में पैसे गंवाए और कई मामलों में परिवारिक विवाद, कर्ज और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। इन चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानून बनाने का फैसला किया।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कई महीनों की रिसर्च और राज्यों से बातचीत के बाद इस बिल का मसौदा तैयार किया था, जिसे संसद के दोनों सदनों ने पारित किया और अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन गया है।
बढ़ते खतरे के चलते आया बिल
पिछले कुछ वर्षों में देश में ऑनलाइन गेमिंग और खासकर सट्टेबाजी वाले खेलों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी थी। कई युवाओं ने इस तरह के खेलों में पैसे गंवाए और कई मामलों में परिवारिक विवाद, कर्ज और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। इन चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानून बनाने का फैसला किया।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कई महीनों की रिसर्च और राज्यों से बातचीत के बाद इस बिल का मसौदा तैयार किया था, जिसे संसद के दोनों सदनों ने पारित किया और अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन गया है।
ड्रीम11 समेत बड़ी कंपनियों पर असर
इस कानून का सबसे बड़ा असर उन कंपनियों पर पड़ा है जो फैंटेसी गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़ी सेवाएं देती थीं। ड्रीम11, माई11सर्कल, MPL जैसी कंपनियां, जिनका कारोबार अरबों में था, अब भारत में अपने संचालन को बंद कर रही हैं।
कानून की मुख्य बातें
नए गेमिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
- किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी या जुए वाले खेलों का संचालन पूरी तरह अवैध होगा।
- ऐसे खेलों का प्रचार करने वाले विज्ञापनों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- स्किल-बेस्ड गेमिंग, ई-स्पोर्ट्स और शैक्षिक गेम्स को इस कानून से छूट दी गई है।
- नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और कठोर दंड लगाया जा सकता है।
सरकार की मंशा
केंद्रीय आईटी मंत्री ने इस बिल को “युवाओं की सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम” की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा,
“हमारी प्राथमिकता है कि युवाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित माहौल मिले। यह कानून न सिर्फ सट्टेबाजी पर रोक लगाएगा बल्कि गेमिंग सेक्टर को और पारदर्शी और संगठित बनाएगा।”
उद्योग में मिले-जुले प्रतिक्रियाएं
गेमिंग इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने इस कानून का स्वागत तो किया है, लेकिन कई कंपनियों ने इसे चुनौतीपूर्ण भी बताया है।
- कुछ कंपनियों का कहना है कि यह कदम रोजगार और निवेश पर असर डालेगा क्योंकि गेमिंग सेक्टर में लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे थे।
- वहीं, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने इस फैसले को युवाओं के लिए “सकारात्मक बदलाव” बताया है।
ई-स्पोर्ट्स और स्किल गेमिंग को राहत
इस कानून में स्किल-बेस्ड गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स को छूट मिलने से इन सेक्टरों को राहत मिली है। अब भी गेमिंग कंपनियां इस दिशा में निवेश कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट और शैक्षिक गेमिंग के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि देखने को मिलेगी।
आर्थिक असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कानून से शुरुआती दौर में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित होगा। हालांकि, लंबी अवधि में पारदर्शी और जिम्मेदार बाजार के कारण नए निवेश की संभावना भी बढ़ सकती है।
आगे का रास्ता
सरकार अब इस कानून के सुचारू क्रियान्वयन के लिए राज्यों के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण बनाने की योजना पर काम कर रही है। यह प्राधिकरण नियमों के पालन की निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर नए संशोधन भी सुझाएगा।
निष्कर्ष
गेमिंग रेगुलेशन बिल का कानून बनना भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होगा। जहां एक ओर यह कदम युवाओं को सट्टेबाजी की लत से बचाएगा, वहीं दूसरी ओर उद्योग को अधिक जिम्मेदार और संगठित बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून डिजिटल गेमिंग की तस्वीर को किस तरह से बदलता है।


