लखनऊ/नोएडा, 16 नवंबर 2025: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2015 में दादरी (ग्रेटर नोएडा) में हुए चर्चित अखलाक लिंचिंग मामले के आरोपी 10 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज सभी मुक़दमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप वापस लेने के आवेदन को लेकर कोर्ट में सुनवाई जल्द ही हो सकती है जो आरोपियों की रिहाई का रास्ता खोल सकती है।

क्या है मामला?
- यह घटना 28 सितंबर 2015 की है, जब दादरी के बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक को भीड़ ने गोमांस रखने की अफवाह पर पीट-पीटकर मार डाला था।
- भीड़ ने अखलाक के बेटे दानिश को भी गंभीर रूप से घायल किया था।
- इस मामले में कुल 10 प्रमुख आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, दंगा और आपराधिक धमकी जैसी गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी।
सरकार ने क्यों पीछे हटाया केस?
- यूपी सरकार ने CrPC की धारा 321 के तहत केस वापस लेने का अनुरोध किया है, जिसके अनुसार राज्य सरकार सार्वजनिक हित में मुकद्दमा वापस ले सकती है।
- सरकार का दावा है कि फोरेंसिक रिपोर्ट में मिले मांस की पुष्टि “गाय या उसकी संतान” के तौर पर हुई थी। इसी आधार पर मुकदमे को “ग़ैर जरूरी” बताते हुए इसे बंद करने का अनुरोध किया गया।
- आरोपियों में से अधिकतर को पहले ही जमानत मिल चुकी है और वे 2017 से ही बाहर हैं।
आगे क्या?
- इस मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर 2025 को सूरजपुर कोर्ट में होनी है, जहां से यह तय होगा कि आरोप वास्तव में वापस लिए जाएंगे या नहीं।
- अगर अदालत सरकार के आवेदन को मान लेती है, तो सभी आरोपी बरी हो सकते हैं और 10 साल पुराना यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो सकता है।


