कौन है कुलदीप सेंगर? सत्ता की हनक से तिहाड़ की सलाखों तक और अब ‘जमानत’ पर छिड़ा घमासान

कुलदीप सेंगर

“विधायक जी” यह वह शब्द था जिससे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में कभी खौफ और रसूख की इबारत लिखी जाती थी। लेकिन आज वही नाम, कुलदीप सिंह सेंगर, देश की न्याय व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर छिड़ी सबसे बड़ी बहस का केंद्र बन गया है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उन्नाव रेप कांड के मुख्य दोषी सेंगर की सजा निलंबित कर उसे जमानत देने के फैसले ने पूरे देश को हैरान कर दिया है।

कौन है कुलदीप सिंह सेंगर?

कुलदीप सिंह सेंगर केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का वह ‘बाहुबली’ चेहरा रहा है जिसने चार बार अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर विधायकी जीती।

  • राजनीतिक रसूख: सेंगर का दबदबा इतना था कि उसने बसपा, सपा और फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। उन्नाव की बांगरमऊ सीट पर उसकी तूती बोलती थी।
  • अपराध और सत्ता का मेल: 2017 में जब उस पर एक नाबालिग से रेप का आरोप लगा, तब वह सत्ताधारी दल का विधायक था। आरोप है कि उसके रसूख के कारण महीनों तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई और पीड़िता को न्याय के लिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश करनी पड़ी।
  • पार्टी से निष्कासन: जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा और देश भर में आक्रोश भड़का, तब जाकर 2019 में भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित किया।

गुनाहों की लंबी फेहरिस्त

कुलदीप सेंगर केवल एक बलात्कार का दोषी नहीं है, बल्कि उस पर साजिश और हत्या के प्रयासों के भी गंभीर आरोप रहे हैं:

  1. रेप केस: 2017 में नाबालिग से बलात्कार के मामले में दिल्ली की अदालत ने उसे “प्राकृतिक जीवन के अंत तक” उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  2. कस्टोडियल डेथ: पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में उसे 10 साल की सजा मिली।
  3. एक्सीडेंट की साजिश: रायबरेली में पीड़िता की कार का संदिग्ध एक्सीडेंट हुआ, जिसमें उसके दो रिश्तेदारों की मौत हो गई। इस मामले में भी सेंगर पर साजिश का आरोप लगा।

हाई कोर्ट का वह फैसला जिसने सबको चौंकाया

23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर को राहत देते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया। कोर्ट का तर्क है कि वह 7 साल से अधिक का समय जेल में बिता चुका है और उसकी अपील पर अंतिम सुनवाई में वक्त लग सकता है।

हालाँकि, कोर्ट ने उस पर 15 लाख का मुचलका, दिल्ली न छोड़ने की पाबंदी और पीड़िता के घर से 5 किमी दूर रहने जैसी कड़ी शर्तें लगाई हैं।

क्यों हो रहा है विरोध?

इस फैसले के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता और पीड़िता का परिवार बेहद डरा हुआ है। लोगों का कहना है कि:

  • अगर इतना रसूखदार अपराधी जेल से बाहर आता है, तो पीड़िता और गवाहों की जान को गंभीर खतरा है।
  • निर्भया कांड के बाद बने सख्त कानूनों का क्या अर्थ रह जाएगा अगर उम्रकैद के दोषियों को 7 साल में राहत मिलने लगे?
  • पीड़िता की माँ का कहना है, “विधायक का रसूख जेल के अंदर से कम नहीं हुआ था, बाहर आकर वह हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा।”

सीबीआई ने इस जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बना लिया है। सवाल अब केवल एक अपराधी की जमानत का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जो आम आदमी न्यायपालिका पर करता है। क्या ‘पावर’ और ‘कानूनी दांवपेच’ एक अपराधी को उसके किए की पूरी सजा से बचा लेंगे? यह आने वाला वक्त तय करेगा।

Nation TV
Author: Nation TV

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