8 मार्च 2014 की वो काली रात विमानन इतिहास के पन्नों में एक ऐसे घाव की तरह दर्ज है, जो आज 11 साल बाद भी हरा है। कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरने वाला मलेशिया एयरलाइंस का विमान MH370 हवा में विलीन हो गया। न कोई मलबे का बड़ा ढेर मिला, न ही उन 239 बदनसीब मुसाफिरों का कोई सुराग। लेकिन अब, जनवरी 2026 की शुरुआत के साथ, हिंद महासागर की लहरों के नीचे एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है।
मिशन ‘आर्मडा’: तकनीक जब बनी उम्मीद का सहारा
इस बार की खोज सामान्य नहीं है:-
अमेरिकी समुद्री विशेषज्ञ कंपनी ‘ओशन इन्फिनिटी’ (Ocean Infinity) ने अपने सबसे आधुनिक बेड़े ‘आर्मडा’ को मैदान में उतारा है।
WSPR तकनीक का चमत्कार: वैज्ञानिकों ने इस बार ‘वीक सिग्नल प्रोपेगेशन रिपोर्टर’ (WSPR) डेटा का उपयोग किया है। यह तकनीक रेडियो तरंगों में आने वाले उन सूक्ष्म व्यवधानों को पकड़ती है जो किसी विमान के गुजरने से पैदा होते हैं। इसी डेटा ने विमान के गिरने की एक नई और सटीक लोकेशन की ओर इशारा किया है।
रोबोटिक फौज: समुद्र के 6,000 मीटर नीचे इस बार इंसानी गोताखोर नहीं, बल्कि AI से लैस Autonomous Underwater Vehicles (AUVs) काम कर रहे हैं, जो बिना किसी बाहरी मदद के हफ्तों तक अंधेरी गहराइयों को स्कैन कर सकते हैं।
नो फाइंड, नो फी’: 580 करोड़ का दांवमलेशियाई सरकार ने इस खोज के लिए एक साहसी समझौता किया है। ‘ओशन इन्फिनिटी’ तभी पैसे लेगी जब वह विमान का मुख्य मलबा या ‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’ (Black Box) ढूंढ निकालेगी।अगर सफलता मिलती है, तो कंपनी को 70 मिलियन डॉलर (₹580 करोड़ से अधिक) दिए जाएंगे।यह समझौता दिखाता है कि कंपनी को अपने नए डेटा और तकनीक पर कितना भरोसा है।
15,000 वर्ग किलोमीटर का ‘डेथ ज़ोन’
पिछली खोजों में लाखों वर्ग किलोमीटर का इलाका छाना गया था, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने अपने दायरे को समेटकर 15,000 वर्ग किलोमीटर के एक विशेष क्षेत्र पर केंद्रित किया है। यह क्षेत्र ‘सेवेंथ आर्क’ (7th Arc) के पास स्थित है, जहाँ विमान का ईंधन खत्म होने की प्रबल संभावना जताई गई थी।
वे अनसुलझे सवाल जिनके जवाब अब भी बाकी हैं.
11 साल बीत जाने के बाद भी दुनिया इन तीन सवालों के जवाब ढूंढ रही है:-
रास्ते से क्यों भटका विमान?
अचानक विमान ने यू-टर्न क्यों लिया और ट्रांसपोंडर (संचार प्रणाली) को किसने और क्यों बंद किया?
पायलट की भूमिका: क्या कैप्टन जहारी अहमद शाह ने जानबूझकर विमान को इस दुर्गम इलाके में उतारा? उनके घर पर मिले सिम्युलेटर डेटा में हिंद महासागर का वही रास्ता मिला था।मलबे का रहस्य: अफ्रीका के तटों पर मिले मलबे के कुछ छोटे टुकड़ों (Flaperon) के अलावा, विमान का मुख्य हिस्सा आज तक क्यों नहीं मिला?
239 परिवारों की आखिरी उम्मीद-:
बीजिंग से लेकर कुआलालंपुर तक, उन परिवारों के लिए यह खोज केवल धातु के एक टुकड़े की तलाश नहीं है। यह उनकी अंतिम विदाई (Closure) का सवाल है। 11 साल से वे एक ऐसे सच का इंतज़ार कर रहे हैं जो शायद समुद्र की रेत के नीचे दबा हुआ है।


