जस्टिस संजीव खन्ना को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शपथ दिलाई। वह देश के मुख्य न्यायाधीश बने वाले 51वें व्यक्ति हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पद उनके पास कुछ महीनों के लिए ही रहेगा।
गौरतलब है कि जस्टिस खन्ना ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का स्थान लिया, जो बीते 10 तारीख को अपने पद से रिटायर हो गए थे l संजीव खन्ना 13 मई, 2025 तक इस पद पर बने रहेंगे।
मालूम हो कि जनवरी 2019 से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस खन्ना कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इन फैसलों में EVM की पवित्रता को बरकरार रखना, अनुच्छेद 370 को निरस्त करना शामिल है। जस्टिस खन्ना एक कानूनी दिग्गजों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता राज खन्ना 1985 में दिल्ली उच्च न्यायालय से न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे और उनकी मां सरोज खन्ना दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता के रूप में काम कर चुकी हैं।
उनके चाचा हंस राज खन्ना थे, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे। संजीव खन्ना ने साल 1977 में मॉडर्न स्कूल नई दिल्ली से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। साल1980 में सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से स्नातक करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई की थी।
कुर्सी पर बैठते ही दी नसीहत
CJI के तौर पर अपने कार्यकाल के पहले दिन जस्टिस पीवी संजय कुमार के साथ जस्टिस खन्ना ने न्यायिक कार्यवाही शुरू की। इस दौरान उनकी अगुवाई वाली पीठ ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और ऋण वसूली न्यायाधिकरण से संबंधित एक मामले की सुनवाई की। मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील मैथ्यूज नेदुम्पारा कर रहे थे।
नेदुम्पारा की एक दलील पर सीजेआई खन्ना भड़क उठे। उन्होंने वकील नेदुम्पारा को फटकार लगाते हुए कहा कि हम यहां आपका लेक्चर सुनने के लिए नहीं आए हैं।


