दिल्ली में राष्ट्रीय बायोबैंक की शुरुआत, मरीजों को मिलेगा व्यक्तिगत उपचार

नई दिल्ली: स्वास्थ्य अनुसंधान और व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार, 6 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (सीएसआईआर-आईजीआईबी) में अत्याधुनिक ‘राष्ट्रीय बायोबैंक’ का उद्घाटन किया। यह पहल भारत को व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल (पर्सनलाइज्ड हेल्थकेयर) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर एक क्रांतिकारी कदम है।

इस नई सुविधा का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत से लोगों के स्वास्थ्य और आनुवंशिक (जेनेटिक) डेटा को एकत्र करना है। इस डेटा का उपयोग बीमारियों की समय पर पहचान करने और भविष्य में प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना (पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट) विकसित करने में मदद करेगा। ‘फेनोम इंडिया नेशनल बायोबैंक’ नाम से शुरू की गई यह परियोजना भारत का अपना लोंगिट्युडिनल हेल्थ डेटाबेस बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह बायोबैंक रोगों की प्रारंभिक पहचान को सुदृढ़ करने, इलाज की रणनीतियों को लक्ष्य-विशिष्ट बनाने और मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग और दुर्लभ आनुवांशिक विकारों जैसी जटिल बीमारियों के विरुद्ध लड़ाई को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बायोबैंक जैसे प्रयासों से अनुसंधान अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज और बाजार में भी उपयोगी साबित होगा।

सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय बायोबैंक की शुरुआत स्वास्थ्य डेटा में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का एक साहसिक कदम है। यह सुविधा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बीमारियों के आणविक तंत्र को बेहतर ढंग से समझने और प्रभावी उपचार विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

यह बायोबैंक भारत को व्यक्तिगत चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा। व्यक्तिगत चिकित्सा का अर्थ है कि प्रत्येक मरीज के आनुवंशिक मेकअप, जीवनशैली और पर्यावरण के आधार पर उपचार को अनुकूलित किया जाए। राष्ट्रीय बायोबैंक से प्राप्त डेटा डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग बीमारियों पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे वे अधिक प्रभावी और लक्षित उपचार विकसित कर सकेंगे।

बायोबैंक में रक्त, ऊतक, डीएनए और अन्य जैविक नमूनों का एक विशाल संग्रह होगा, जिसे दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित रखा जाएगा। यह संग्रह वैज्ञानिकों को विभिन्न बीमारियों के आनुवंशिक और आणविक आधार का अध्ययन करने और नई नैदानिक विधियों और उपचारों की पहचान करने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘फेनोम इंडिया नेशनल बायोबैंक’ मधुमेह के कारण विविधताओं और संबंधित विकारों के अध्ययन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके लिए जैविक नमूनों को इकट्ठा, प्रोसेस, स्टोर और वितरित करने का कार्य किया जाएगा। यहां लंबे समय तक बायो सैंपल्स सुरक्षित रह सकेंगे, जिससे मधुमेह के कारणों पर गहन शोध किया जा सकेगा और इसकी रोकथाम के लिए नए तरीके विकसित किए जा सकेंगे।

यह पहल न केवल बीमारियों के बेहतर उपचार में सहायक होगी, बल्कि यह अनुसंधानकर्ताओं को नई दवाएं और निदान विकसित करने के लिए एक अनूठा मंच भी प्रदान करेगी। इससे भारतीय वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

राष्ट्रीय बायोबैंक की स्थापना भारत के स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। यह न केवल मरीजों को बेहतर और व्यक्तिगत उपचार प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह देश को चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के विजन को भी साकार करने में मदद करेगा। इस बायोबैंक से एकत्र किया गया डेटा आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और हर भारतीय को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगा।

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Author: Nation TV

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