वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने व्यापारिक हथियारों का प्रदर्शन करते हुए ब्रिक्स देशों को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने ब्रिक्स समूह की कथित “अमेरिका विरोधी नीतियों” का समर्थन करने वाले किसी भी देश पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी है। यह धमकी उन्होंने ऐसे समय में दी है जब ब्रिक्स देशों के समूह ने बिना किसी का नाम लिए शुल्क वृद्धि की निंदा की थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार रात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अपनी यह चेतावनी जारी की। उन्होंने लिखा, “कोई भी देश जो ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों के साथ जाएगा, उस पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा। इस मामले पर आपके ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”
ट्रंप का यह बयान ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद आया है। इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। शिखर सम्मेलन के अंत में जारी किए गए घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों ने बढ़ती संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापारिक कदमों पर चिंता व्यक्त की थी, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका या राष्ट्रपति ट्रंप का नाम नहीं लिया था।
ब्रिक्स समूह, जिसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, का 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हो गए। 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह में शामिल हो गया। यह समूह वैश्विक आबादी के एक बड़े हिस्से और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए ट्रंप की यह धमकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मायने रखती है।
ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में यह भी कहा कि अमेरिका सोमवार से विभिन्न देशों को टैरिफ और समझौतों पर “पत्र” भेजेगा। उन्होंने लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ पत्र, और/या समझौते, दुनिया भर के विभिन्न देशों के साथ, सोमवार, 7 जुलाई को दोपहर 12 बजे (पूर्वी समय) से वितरित किए जाएंगे। इस मामले पर आपके ध्यान देने के लिए धन्यवाद! डोनाल्ड जे ट्रंप, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति।”
ब्रिक्स देशों ने ट्रंप का नाम लिए बिना अपने घोषणा पत्र में बढ़ती शुल्क दरों, वैश्विक सैन्यीकरण और क्षेत्रीय आक्रामकता की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी, जिनका कहना था कि वे वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता को खतरे में डालते हैं। ब्रिक्स ने एकतरफा शुल्क वृद्धि की निंदा की और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम “वैश्विक व्यापार को कम करने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने और अनिश्चितता पैदा करने की धमकी देते हैं।” घोषणा पत्र में यह भी कहा गया कि ऐसी प्रतिबंधात्मक नीतियां “विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।”
ट्रंप की इस धमकी पर चीन ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। चीन ने कहा कि ब्रिक्स टकराव का मंच नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिक्स का उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी देश बहुपक्षवाद का सम्मान करेंगे और व्यापारिक विवादों को बातचीत के माध्यम से हल करेंगे।
भारत के लिए यह धमकी विशेष रूप से चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि भारत ब्रिक्स का एक महत्वपूर्ण सदस्य है और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। भारत ने ब्रिक्स घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें अमेरिकी टैरिफ उपायों की निंदा की गई थी। ऐसे में, ट्रंप की यह चेतावनी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को प्रभावित कर सकती है, जिसकी प्रगति पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम 9 जुलाई को टैरिफ पर संभावित रोक की समय सीमा से ठीक पहले आया है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों पर दबाव बनाना हो सकता है। यह देखना होगा कि ब्रिक्स देश इस धमकी का क्या जवाब देते हैं और वैश्विक व्यापार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति के क्षेत्र में एक नया मोड़ लेकर आया है।


