उदयपुर के एक प्रतिष्ठित क्षेत्र में एक निजी कंपनी की महिला कर्मचारी के साथ जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया है। यह मामला केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि भरोसे और पद के दुरुपयोग की पराकाष्ठा है।
क्या होती है ‘आफ्टर पार्टी’ और कैसे बुना गया जाल?
कॉर्पोरेट जगत में ‘आफ्टर पार्टी’ का चलन काफी बढ़ गया है। अक्सर जब ऑफिस की आधिकारिक पार्टी (Official Party) खत्म हो जाती है, तो कुछ खास लोग किसी दूसरी जगह (जैसे किसी का घर या कार) पर जाकर दोबारा पार्टी करते हैं।
- घटनाक्रम: एक होटल में ऑफिस की तरफ से आयोजित पार्टी के बाद, जब बाकी कर्मचारी घर लौट गए, तो आरोपी अधिकारियों ने पीड़िता को ‘आफ्टर पार्टी’ के लिए साथ चलने को कहा।
- मजबूरी और झांसा: पीड़िता की तबीयत खराब होने के बावजूद, उसे घर छोड़ने के बहाने अपनी लग्जरी कार में बैठाया गया। आरोप है कि कार में उसे नशीला पदार्थ दिया गया जिससे वह बेहोश हो गई।
कार में हुई दरिंदगी का सच
पीड़िता के बयान के अनुसार, जब वह कार में अर्ध-मूर्छित अवस्था में थी, तब उसके साथ घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया।
- सहयोगियों की भूमिका: इस अपराध में न केवल पुरुष अधिकारी शामिल थे, बल्कि वहाँ मौजूद एक महिला अधिकारी ने भी पीड़िता की मदद करने के बजाय आरोपियों का साथ दिया।
- चलती कार में अपराध: पूरी वारदात शहर की सड़कों पर चलती हुई कार के भीतर हुई। आरोपियों ने पीड़िता के बेसुध होने का फायदा उठाया।
- साक्ष्य मिटाने की कोशिश: पीड़िता को सुबह तड़के उसके घर के बाहर छोड़ा गया। होश आने पर जब उसे शरीर पर चोट के निशान मिले, तब उसे इस भयानक हादसे का अहसास हुआ।
पुलिस की जांच और अहम सबूत
पुलिस ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
- डैशकैम (Dashcam) बना गवाह: आरोपियों की कार में लगा डैशकैम पुलिस के लिए सबसे बड़ा सबूत साबित हुआ है। इसमें घटना के समय की बातचीत और कुछ फुटेज रिकॉर्ड हुए हैं, जो आरोपियों के दावों की पोल खोलते हैं।
- मेडिकल रिपोर्ट: पीड़िता की मेडिकल जांच में यौन हमले और शरीर पर चोटों की पुष्टि हुई है।
- कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ जारी है।


